न जाने क्या ढूंढ रहे हो खुद में
लगता है गहरे राज़ छुपाए घूम रहे हो।
जो समझ ना पाए तुम्हे कभी
क्यों उन्हें समझाने में लगे हो?
जो समझ लेते है तुम्हे
क्यों उनसे दूर भाग रहे हो?
जो खड़े है हर मोड़ साथ तुम्हारे
क्यों उनसे नज़रे फेर रहे हो?
मानो या ना मानो
उनके होने से ही तुम पहले से बेहतर लग रहे हो।
सरसराती सी शाम गुज़र जाती है,
मानो कोई पैगाम छोड़ जाती है।
आसमान भी एक चादर सी ओढ़ लेता है,
कुछ अलग ही रंगत में खुद को ढाल लेता है।
ख्वाहिशों का थोड़ा दामन अधूरा सा रहता है,
सूरज के ढलने के बाद ही तो नया सवेरा होता है।
मंजिले तो सबकी एक ही है बस रास्ते बदल जाते है,
ज़रूरतों को पूरा करने में दिन यू ही गुज़र जाते है।
कुछ बातों को भुलाना ज़रूरी होता हैं,
आसान ज़िन्दगी जीने का यही तरीका होता है।
चमकती आंखों में थोड़े आंसू छुपाना ज़रूरी होता है,
हर माहौल में खुद को ढालने का यही तरीका होता है।
हर रंग में ज़िन्दगी रंगना ज़रूरी होता है,
खुशियों का पिटारा भरने का यही तरीका होता है।
कुछ फैसले लेने में डर सा लगता है,
दिल और दिमाग में छिड़ी जंग को रोकना आसान कहां होता है।
क्या सही है क्या गलत ये किसे पता होता है,
लिए गए फैसलों पर भी शक सा रहता है।
कुछ उलझनों को सुलझाने में वक़्त लगता है,
उलझने सुलझ भी जाए फिर भी मन में डर सा लगता है।
उम्मीदें जिंदगी से…

रब से भी फरियाद नहीं कर पाते है हम।
शिकायतें तो बहुत रखते है मन में
लेकिन किसको जा कर कहे हम।
ख्वाब तो ऊंचे हम भी देखते है,
लेकिन इन्हें कैसे पूरा करें हम।
पेट की भूख मिटाने में
ज़िन्दगी के हर एक रंग से वाकिफ हो जाते है हम।
ना जाने कैसी बेड़ियों में बंधे है
जिसे चाह कर भी तोड़ नहीं पाते है हम।
बस यही उम्मीद लगाए रखते है,
ज़िन्दगी की थोड़ी खूबसरती देख पाए हम।

अलग किरदार निभाते है ।
ये ज़िन्दगी है साहब,
इसे हर हाल में जीते ही जाते है ।

हर पेड़ की जड़े मजबूत नहीं होती,
फिर भी उसकी छाया में कोई कमी नहीं होती।
झड़ जाते है सब पत्ते जब किसी पेड़ के,
तब भी इंसान को सहारा देने की उसकी ताकत कम नहीं होती।
हाथ थामकर सही राह दिखा देते हैं,
चेहरा देखते ही हर बात समझ जाते हैं ।
थोड़ा सा भी गिरने लगे तब हमें संभाल लेते हैं,
दिल के हर बोझ को कम कर देते हैं ।
थोड़े प्यार से तो थोड़ी डांट से गलतियां सुधार देते हैं,
अंधेरों में अपने प्रकाश से रोशनी दिखा देते हैं।
गले से लगाकर अपनेपन का ऐहसास करा देते हैं,
ये वही फरिश्ते है जो हमारी ज़िन्दगी सँवार देते हैं।

एक परिंदा

पिंजरे में कैद रह के रास्ते खोज रहा था,
उड़ने से पहले पंख मजबूत कर रहा था।
थोड़ा फड़फड़ा रहा था तो थोड़ा घबरा रहा था,
ऊंची उड़ान भरने की कोशिश कर रहा था।
पिंजरा खुलते ही अपनी मंज़िल की और बढ़ रहा था,
अपने काफिले के साथ तेज़ हवा में भी उड़ान भर रहा था।